2 .53 hindi -2.53 | स्थिर बुद्धि ही सच्चा योग है#BhagavadGita #श्लोक253 #स्थिरबुद्धि
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला। समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि॥ [2.53] [thoughtful] श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं—जब अलग-अलग बातें सुनकर उलझी हुई तुम्हारी बुद्धि शांत और स्थिर हो जाएगी, तब तुम योग की अवस्था को प्राप्त करोगे। जीवन में हमें हर तरफ से अलग सलाह मिलती है। कोई कहता है यह करो, कोई कहता है वह करो। हर व्यक्ति अपनी बात को सही बताता है। अगर हम हर आवाज के पीछे चलते रहें, तो मन कभी सही फैसला नहीं ले पायेगा संत कबीर का जीवन इसे अच्छी तरह समझाता है। उनके समय में धर्म और समाज के नाम पर बहुत-से भेदभाव और विरोध चल रहे थे। हिंदू और मुस्लिम—दोनों समुदायों के कट्टर लोग अपनी-अपनी बात को अंतिम सत्य मानते थे। लेकिन कबीर किसी एक पक्ष के दबाव में नहीं आए। न वो मुसलमानो के साथ थे और न हिन्दुओ के साथ. उन्होंने साफ कहा कि केवल बाहरी पूजा, कपड़े या पहचान से इंसान महान नहीं बनता। असली बदलाव मन की सच्चाई, प्रेम और अच्छे व्यवहार से आता है। विरोध और आलोचना के बावजूद उनकी सोच नहीं डगमगाई। वे अपने समझे हुए सत्य पर स्थिर रहे। [emphatic] हर बात सुनिए, लेकिन हर बात के पीछे मत चलिए। सोचिए, समझिए और फिर अपनी बुद्धि को सत्य पर स्थिर कीजिए। #BhagavadGita #Kabir #LifeLessons #Wisdom #InnerPeace #SelfRealization #Mindfulness #motivation Bimal Bangar
Discover the context
About this Short
This Mahakavya presentation belongs to the Bhagavad Gita collection and is available in English. Use the related stories below to continue through connected teachings and episodes.