Arjun Ke Man Me Kaun Sa Yudh Chal Raha Tha?
युद्ध शुरू होने से ठीक पहले अर्जुन के मन में सबसे बड़ा युद्ध चल रहा था। सामने शत्रु नहीं, बल्कि अपने ही गुरु, पितामह, भाई, रिश्तेदार और मित्र खड़े थे। एक ओर क्षत्रिय धर्म था, अन्याय के खिलाफ लड़ने का कर्तव्य था। दूसरी ओर परिवार के प्रति प्रेम, करुणा और मोह था। अर्जुन सोचने लगे कि अपने ही लोगों को मारकर जीत का क्या अर्थ है। यही उनका अंदरूनी संघर्ष था—कर्तव्य और भावना के बीच, धर्म और मोह के बीच। इसी मानसिक युद्ध से भगवद्गीता की शुरुआत होती है, जहाँ श्रीकृष्ण अर्जुन को सही दृष्टि देते हैं। BIMAL BANGAR
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About this Short
This Mahakavya presentation belongs to the Bhagavad Gita collection and is available in Hindi. Use the related stories below to continue through connected teachings and episodes.