2. 59 Hindi -2.59 | इच्छा को दबाना नहीं, उससे ऊपर उठना सीखो#BhagavadGita #श्लोक259 #इच्छा
[thoughtful] भगवद् Gita अध्याय 2, श्लोक 59 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः। रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥ [2.59] [thoughtful] श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं—किसी चीज से केवल दूरी बना लेने से उसकी इच्छा हमेशा खत्म नहीं होती। बाहर से हम उसे छोड़ सकते हैं, लेकिन उसकी चाह मन के अंदर बनी रह सकती है। वह चाह सच में तब कमजोर होती है, जब हमें उससे भी बड़ा उद्देश्य और गहरा संतोष मिल जाता है। मान लीजिए कोई व्यक्ति मिठाई खाना बंद कर देता है, लेकिन पूरे दिन उसी के बारे में सोचता रहता है। उसने मिठाई छोड़ी है, उसकी इच्छा नहीं। केवल रोकना self-control का पहला step है। असली बदलाव तब आता है, जब मन को उससे बेहतर कारण मिल जाता है। रूस के महान लेखक Leo Tolstoy का जीवन इसे समझाता है। वे दुनिया की सबसे प्रसिद्ध novels में से एक, War and Peace, के लेखक थे। Tolstoy एक बहुत धनी परिवार से थे। उन्हें पैसा, प्रसिद्धि और समाज में बड़ा सम्मान मिला। उनकी किताबें सफल थीं, लेकिन इतनी सफलता के बाद भी उनके अंदर गहरी बेचैनी बनी रही। उन्होंने सवाल करना शुरू किया—जीवन का असली उद्देश्य क्या है? धीरे-धीरे उनका ध्यान धन, status और luxury से हटकर सरल जीवन, सेवा और मानवता की तरफ गया। उन्होंने अपने जीवन को ज्यादा सादा बनाया और बाहरी सफलता से ज्यादा अंदर की शांति को महत्व देना शुरू किया। [emphatic] केवल इच्छा को दबाने से मन शांत नहीं होता। जब जीवन में कोई बड़ा purpose मिल जाता है, तो छोटी इच्छाओं की पकड़ अपने आप कमजोर होने लगती है। #BhagavadGita #Gita #BhagavadGita259 #GitaChapter2 #GitaShlok #Krishna #ShriKrishna #Arjuna #GitaWisdom #KrishnaVani #Spirituality #SelfControl #SelfDiscipline Bimal Bangar
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