2 .48 Hindi -सफलता और असफलता दोनों में balance रखें | Bhagavad Gita Shlok 2.48 in Hindi
श्लोक 2.48 [thoughtful] श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं—सफलता की चिंता में फँसे बिना अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करो। काम सफल हो या असफल, दोनों स्थितियों में मन का balance बनाए रखो। यही सच्चा योग है। इसका मतलब यह नहीं कि सफलता मिलने पर खुश मत हो या असफलता मिलने पर दुख मत महसूस करो। भावनाएँ स्वाभाविक हैं। लेकिन सफलता हमें घमंडी न बनाए और असफलता हमें इतना न तोड़ दे कि हम दोबारा कोशिश ही न करें। Thomas Edison का एक ही लक्ष्य था : इलेक्ट्रिक बल्ब को आम लोगों तक पहुंचना, Thomas Edison को electric bulb को practical बनाने में बार-बार असफलता मिली। कभी filament जल्दी जल जाता था, कभी bulb कुछ ही समय में बुझ जाता था और कभी सही material नहीं मिलता था। लेकिन Edison ने हर असफल प्रयोग को हार नहीं माना। उन्होंने उससे सीखा, तरीका बदला और फिर कोशिश की। आखिरकार उनकी लगातार मेहनत से ऐसा electric bulb तैयार हुआ, जिसका लंबे समय तक उपयोग किया जा सकता था। [emphatic] एक सफलता आपकी पूरी पहचान नहीं है और एक failure आपका भविष्य तय नहीं करता। दोनों में सन्तुलित रहिए, सीखते रहिए और अपना कर्म जारी रखिए। #BhagavadGita #GitaShlok #Shlok2.48 #GitaInHindi #SuccessAndFailure #Balance #KarmaYoga #MentalStrength #Krishna #Mahakavya BIMAL BANGAR
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This Mahakavya presentation belongs to the Bhagavad Gita collection and is available in Hindi. Use the related stories below to continue through connected teachings and episodes.