2. 62 Hindi 2.62 | सोच से लगाव, लगाव से इच्छा, इच्छा से क्रोध#BhagavadGita #श्लोक262 #क्रोध
[thoughtful] भगवद् Gita अध्याय 2, श्लोक 62 ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ [2.62] [thoughtful] श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं—जब इंसान किसी चीज के बारे में बार-बार सोचता रहता है, तो धीरे-धीरे उसका मन उससे जुड़ने लगता है। उस जुड़ाव से उसे पाने की तेज इच्छा पैदा होती है। और जब वह इच्छा पूरी नहीं होती, तो उसी से गुस्सा पैदा होने लगता है। यानी गुस्सा अचानक नहीं आता। उसके पीछे अक्सर एक पूरी chain होती है—पहले विचार, फिर लगाव, फिर इच्छा और आखिर में गुस्सा। इसे महान boxer Mike Tyson के 1997 के Evander Holyfield के साथ मुकाबले से समझिए। Tyson दुनिया के सबसे खतरनाक boxers में गिने जाते थे। लेकिन Holyfield के खिलाफ मुकाबले में वे लगातार परेशान और frustrated होते गए। उनका पूरा ध्यान जीतने पर था। जैसे-जैसे मुकाबला उनके मन के मुताबिक नहीं चला, frustration बढ़ती गई। एक समय ऐसा आया जब जीतने की इच्छा और मुकाबले की घटनाओं को लेकर उनका गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने अपना control खो दिया और Holyfield के कान पर काट लिया। परिणाम यह हुआ कि Tyson को मुकाबले से disqualify कर दिया गया। एक महान खिलाड़ी का कुछ क्षणों का uncontrolled anger पूरे मुकाबले पर भारी पड़ गया। [emphatic] श्री कृष्ण हमें गुस्से से पहले की chain पहचानना सिखाते हैं। जिस चीज के बारे में हम बार-बार सोचते हैं, वही पहले लगाव बनती है, फिर इच्छा—और इच्छा रुक जाए तो वही गुस्से में बदल सकती है। इसलिए control गुस्से के बाद नहीं, विचार के स्तर से शुरू होता है। #BhagavadGita #Gita #Gita2_62 #Krishna #Arjuna #Anger #AngerManagement #Thoughts #Attachment #Desire #SelfControl Bimal Bangar
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This Mahakavya presentation belongs to the Bhagavad Gita collection and is available in Hindi. Use the related stories below to continue through connected teachings and episodes.