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Watch cinematic Mahakavya Shorts about the Bhagavad Gita, Indian epics and ancient wisdom in Hindi and English.

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2 .15 Hindi -जो सुख और दुख में स्थिर रहता है, वही आगे बढ़ता है | Bhagavad Gita Shlok 2.15 in Hindi SHORT 1:20

2 .15 Hindi -जो सुख और दुख में स्थिर रहता है, वही आगे बढ़ता है | Bhagavad Gita Shlok 2.15 in Hindi

श्लोक 2.15 जो व्यक्ति सुख और दुख से पूरी तरह विचलित नहीं होता और दोनों स्थितियों में अपना balance बनाए रखता है, वह जी...

2 .13 Hindi बचपन, जवानी और बुढ़ापे की तरह मृत्यु भी एक बदलाव है | Bhagavad Gita Shlok 2.13 in Hindi SHORT 1:28

2 .13 Hindi बचपन, जवानी और बुढ़ापे की तरह मृत्यु भी एक बदलाव है | Bhagavad Gita Shlok 2.13 in Hindi

श्लोक 2.13 जिस प्रकार एक ही शरीर में बचपन, जवानी और बुढ़ापा आता है, उसी प्रकार मृत्यु के बाद आत्मा दूसरे शरीर को प्रा...

2.11 Hindi समझदार व्यक्ति किसके लिए शोक नहीं करता? | Bhagavad Gita Shlok 2.11 SHORT 1:31

2.11 Hindi समझदार व्यक्ति किसके लिए शोक नहीं करता? | Bhagavad Gita Shlok 2.11

श्लोक 2.11 श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तुम उन लोगों के लिए दुखी हो रहे हो जिनके लिए इस प्रकार शोक करना उचित नहीं...

2.10 Hindi अर्जुन के दुख के बीच श्री कृष्ण क्यों मुस्कराए? | Bhagavad Gita Shlok 2.10 SHORT 1:24

2.10 Hindi अर्जुन के दुख के बीच श्री कृष्ण क्यों मुस्कराए? | Bhagavad Gita Shlok 2.10

श्लोक 2.10 दोनों सेनाओं के बीच अर्जुन दुखी और निराश बैठे थे। तब श्री कृष्ण हल्की मुस्कान के साथ उनसे बात करना शुरू कर...

2.09HINDI जब अर्जुन ने कह दिया—मैं युद्ध नहीं करूँगा | Bhagavad Gita Shlok 2.09 SHORT 1:22

2.09HINDI जब अर्जुन ने कह दिया—मैं युद्ध नहीं करूँगा | Bhagavad Gita Shlok 2.09

श्लोक 2.09 अर्जुन अपनी पूरी दुविधा श्री कृष्ण के सामने रखने के बाद कहते हैं—मैं युद्ध नहीं करूँगा। इतना कहकर वे चुप ह...

2.08 Hindi जब दुनिया की सारी सफलता भी दुख दूर न कर पाए | Bhagavad Gita Shlok 2.08 in Hindi SHORT 1:19

2.08 Hindi जब दुनिया की सारी सफलता भी दुख दूर न कर पाए | Bhagavad Gita Shlok 2.08 in Hindi

श्लोक 2.08 अर्जुन कहते हैं कि उनका दुख इतना गहरा है कि पृथ्वी का सबसे समृद्ध राज्य या देवताओं जैसा सुख भी उसे दूर नही...

2.07 Hindi जब अर्जुन ने श्री कृष्ण को अपना गुरु स्वीकार किया | Bhagavad Gita Shlok 2.07 in Hindi SHORT 1:18

2.07 Hindi जब अर्जुन ने श्री कृष्ण को अपना गुरु स्वीकार किया | Bhagavad Gita Shlok 2.07 in Hindi

अर्जुन स्वीकार करते हैं कि उनका मन कमजोरी, मोह और भ्रम से घिर चुका है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके लिए सही क्या है...

2.06 Hindi जीतना बेहतर है या हारना? अर्जुन की सबसे बड़ी दुविधा | Bhagavad Gita Shlok 2.6 in Hindi SHORT 1:33

2.06 Hindi जीतना बेहतर है या हारना? अर्जुन की सबसे बड़ी दुविधा | Bhagavad Gita Shlok 2.6 in Hindi

भगवद् Gita के श्लोक 2.6 में अर्जुन कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि युद्ध में जीतना अच्छा होगा या हारना। जिन लोगो...

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